Sanskriti

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शब्दों से संसार रचने की परंपरा

पुस्तक संस्कृति के बारे में

Pustak Sanskriti / Sanskriti Prakashan का संचालन डॉ. नीलावती मेघानी करती हैं। संस्था का कार्यालय वडोदरा, गुजरात में है।

डॉ. नीलावती मेघानी, Pustak Sanskriti की CEO
CEOPustak Sanskriti
हमारी कहानी

डॉ. नीलावती मेघानी और Pustak Sanskriti

डॉ. नीलावती मेघानी Pustak Sanskriti की CEO हैं और वर्तमान में Sanskriti Prakashan के पारिवारिक व्यवसाय का संचालन करती हैं।

स्रोत परिचय के अनुसार उन्होंने हिंदी में M.A., M.Phil., B.Ed., हिंदी अनुवाद में P.G. Diploma और डॉक्टरेट किया है; वे हिंदी विभाग एवं सह-पाठ्यक्रम विभाग की प्रमुख रह चुकी हैं, आकाशवाणी में अंशकालिक हिंदी उद्घोषक रही हैं और हिंदी में कविता तथा यात्रा-वृत्तांत लिखती हैं।

  • हर पांडुलिपि का दो अनुभवी संपादकों द्वारा मूल्यांकन
  • संपादन, आवरण डिज़ाइन और ISBN की स्पष्ट एवं सुव्यवस्थित प्रक्रिया
  • पारदर्शी अनुबंध और नियमित रॉयल्टी विवरण
  • लेखक के कॉपीराइट और रचनात्मक स्वामित्व का सम्मान
हमारे साथ प्रकाशित करें
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हमारा उद्देश्य

अर्थपूर्ण साहित्य को दूर तक पहुँचाना

हम मानते हैं कि एक अच्छी पुस्तक केवल प्रकाशित नहीं होती, उसे समझा, सँवारा और सही पाठकों तक पहुँचाया जाता है।

इसीलिए हमारी संपादकीय प्रक्रिया रचना की मौलिक आवाज़ को सुरक्षित रखते हुए उसे अधिक प्रभावी बनाती है। हमारा हर निर्णय दीर्घकालिक लेखक संबंध, पाठकीय विश्वास और साहित्यिक गुणवत्ता को ध्यान में रखकर लिया जाता है।

हमारी दृष्टि

भारतीय भाषाओं और विविध अनुभवों से जन्मी उत्कृष्ट रचनाओं को विश्वभर के पाठकों तक पहुँचाने वाला विश्वसनीय साहित्यिक मंच बनना।

हमारा मिशन

लेखकों को संवेदनशील संपादन, विचारपूर्ण डिज़ाइन, पारदर्शी प्रकाशन और प्रभावी वितरण के माध्यम से स्थायी पहचान देना।

हमारे मूल्य

वे सिद्धांत जिन पर हम कभी समझौता नहीं करते

हर पुस्तक, हर लेखक और हर पाठक के प्रति हमारी जिम्मेदारी इन्हीं मूल्यों से तय होती है।

लेखक सर्वोपरि

हर निर्णय से पहले हम पूछते हैं: क्या यह लेखक और उसकी रचना के हित में है?

पूर्ण पारदर्शिता

स्पष्ट अनुबंध, सरल शर्तें और रॉयल्टी की सहज जानकारी हमारे हर संबंध की नींव है।

संख्या से पहले गुणवत्ता

हम कम लेकिन बेहतर पुस्तकें प्रकाशित करने और हर शीर्षक को पूरा संपादकीय ध्यान देने में विश्वास रखते हैं।

जड़ों से जुड़ाव, विश्व तक पहुँच

हमारी संवेदना भारतीय है और हमारी दृष्टि वैश्विक, ताकि स्थानीय कहानियाँ सीमाओं से परे जा सकें।

हमारी यात्रा

एक छोटी शुरुआत से वैश्विक पाठक समुदाय तक

हर पड़ाव ने हमारे मूल विश्वास को और मजबूत किया: अच्छी कहानियों को धैर्य, कौशल और सही मंच की आवश्यकता होती है।

2009

सूरत में पहला अध्याय

दो संपादकों, एक उधार की मेज़ और चार कविता संग्रहों के साथ Sanskriti Prakashan की नींव रखी गई।

2013

पहली राष्ट्रीय बेस्टसेलर

हमारी पुस्तकों ने 50,000 प्रतियों का आँकड़ा पार किया और Sanskriti collection को राष्ट्रीय पहचान मिली।

2017

अपना डिज़ाइन स्टूडियो

आवरण और पुस्तक डिज़ाइन की पूरी प्रक्रिया संस्थान के भीतर लाई गई, जिससे हर शीर्षक को अलग और विचारपूर्ण पहचान मिली।

2020

डिजिटल प्रकाशन की ओर

ई-पुस्तक और ऑडियो रूपांतरण को प्रकाशन प्रक्रिया का नियमित हिस्सा बनाया गया, ताकि पाठक अपनी पसंद के माध्यम में पढ़ सकें।

2023

वैश्विक वितरण नेटवर्क

19 देशों और 3,400 से अधिक भौतिक पुस्तक विक्रेताओं तक पहुँच बनाने वाली साझेदारियों के साथ हमारा पाठक परिवार विस्तृत हुआ।

2026

800 से अधिक शीर्षक

430 से अधिक लेखकों के साथ आगे बढ़ते हुए भी हमारा मूल प्रश्न वही है: क्या यह निर्णय लेखक और पाठक के लिए बेहतर है?

हमारी टीम

वे लोग जो हर पुस्तक को अपना समय और समझ देते हैं

सूरत में एक साथ काम करने वाली 28 सदस्यीय टीम, जहाँ संवाद सीधा है और हर परियोजना को व्यक्तिगत ध्यान मिलता है।

Rajiv Deshpande का चित्र

Rajiv Deshpande

संस्थापक एवं प्रकाशक

भारतीय प्रकाशन में तीन दशकों का अनुभव। उनका मानना है कि श्रेष्ठ संपादन वही है जिसे पाठक महसूस करे, पर देख न पाए।

Priya Nair का चित्र

Priya Nair

संपादकीय निदेशक

14 संपादकों की टीम का नेतृत्व करती हैं और नई साहित्यिक आवाज़ों को पहचानने के लिए जानी जाती हैं।

Arun Khanna का चित्र

Arun Khanna

रचनात्मक निदेशक

डिज़ाइन स्टूडियो का नेतृत्व करते हैं और मानते हैं कि हर आवरण छोटे आकार में भी अपनी कहानी स्पष्ट कहे।

Lakshmi Rao का चित्र

Lakshmi Rao

वितरण प्रमुख

चार शहरों से 19 देशों तक खुदरा नेटवर्क का विस्तार किया और पुस्तकों को सही बाज़ार तक पहुँचाने की रणनीति बनाई।

लेखकों की आवाज़

हमारे लेखक क्या कहते हैं

Sanskriti की संपादकीय टीम ने मेरी पांडुलिपि को बदला नहीं, बल्कि उसकी वास्तविक आवाज़ को और स्पष्ट किया। पूरी प्रक्रिया आत्मीय और पारदर्शी रही।

Meera Joshi का चित्र
Meera Joshiउपन्यासकार

पहली पुस्तक प्रकाशित करना मेरे लिए नया अनुभव था। हर चरण पर स्पष्ट मार्गदर्शन मिला और मुझे कभी अकेला महसूस नहीं हुआ।

Kabir Mehta का चित्र
Kabir Mehtaकवि

सुंदर डिज़ाइन, समयबद्ध संवाद और पाठकों तक प्रभावी पहुँच ने मेरी पुस्तक को वह पहचान दी जिसकी मैंने कल्पना की थी।

Ananya Sen का चित्र
Ananya Senगैर-कथा लेखिका
मासिक पत्र

Sanskriti पत्र

हर महीने एक विचारपूर्ण ईमेल: नई पुस्तकें, लेखक संवाद, लेखन-कला से जुड़े आलेख और कार्यशालाओं की अग्रिम जानकारी।

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